लोजपा कार्यालय पर पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय ज्ञानी जैल सिंह का मनाया परिनिर्वाण दिवस– रिपोर्ट: अमन गुप्ता

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आजमगढ़ : अखिल भारतीय ठठेरा, कसेरा,ताम्रकार महासभा एवं अखिल भारतीय विश्वकर्मा महासभा संयुक्त रुप से महामहिम पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय ज्ञानी जैल सिंह साहब का परिनिर्वाण महोत्सव एवं सम्मान समारोह का कार्यक्रम लोक जनशक्ति पार्टी कार्यालय- कलेक्ट्री ,कचहरी, नगर पालिका रोड आजमगढ़ पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रवण विश्वकर्मा एवं संचालन हौशिला राजभर ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित पुष्प अर्पित करते हुए महामहिम के चित्र पर माल्यार्पण का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय सूर्यमुखी गोंड ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति उन लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं जो गरीब वंचित शोषित वर्ग हैं इन्होंने अपने आत्म बल और साहस से इतनी ऊंचाई पर पहुंचे हम लोग वंचित वर्गों के लोगों लिए गौरव की बात है इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि गण:- यशवंत सिंह चौहान एवं विवेक गुप्ता उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए इनके बताए हुए मार्ग पर चलने का युवा वर्ग की जरूरत है तभी जाकर अपने अधिकारों की प्राप्ति हो सकती है पूर्व शिक्षक जोखू गुप्ता जी ने इनके अनंत जीवन काल की चर्चा की इनको संघर्षो का मार्ग बताया जो इनके मार्ग पर चलेगा कभी भी विचलित नहीं होगा कार्यक्रम के संयोजक शिव मोहन शिल्पकार प्रदेश अध्यक्ष अपने संबोधन में बताया कि हम लोग प्रत्येक वर्ष इनकी पुण्यतिथि के साथ-साथ जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं काफी बड़े पैमाने पर कार्यक्रम होता है लेकिन करो ना वैश्विक महामारी के चलते सीमित दायरे में यह कार्यक्रम संपन्न किया गया है स्वर्गी ज्ञानी जैल सिंह साहब का जन्म 5 मई 1916 को विश्वकर्मा वंश के  रामगढ़िया कुल के गांव सधवा फरीदकोट पंजाब प्रांत में हुआ ज्ञानी जी का प्रारंभिक नाम जनरैल सिंह था स्वतंत्र संग्राम के दौरान जेल में अधिक दिन व्यतीत करने तथा जेलर से वार्ता के दौरान अपना नाम और पता दोनों जेल बताने पर स्वतंत्रा संग्राम के सेनानियों ने जेल के साथ सिंह जोड़कर “जैल सिंह” तथा “जेल का शेर” के नाम से विख्यात कर दिया यह एक महान देशभक्त, प्रजातांत्रिक आंदोलन के महान सेनानी समाजवादी अर्थव्यवस्था के प्रबल पक्षधर, दूर दृष्टा ,धवल चरित्र  सहितयानुरागी एवं शायराना प्रवृत्ति के धनी थे इनके द्वारा 1938 में ” प्रज्ञा मंडल” की स्थापना करके देशी राजाओं और अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष किया! 1943 तक लगातार कई रूपरेखा तैयार कर अंग्रेजी और रियासतों दोनों के विरुद्ध एक अलग सरकार की रूप दिया! अंग्रेजी और रियासतों को घुटने टेकने पर  मजबूर कर दिया! अनेकों यातना के बावजूद भी उनका संघर्ष जारी रहा दलितों एवं पिछड़ों के राजनीतिक निव  डालने वाले प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पुरोधा बने पंजाब प्रांत मे राजनीतिक  वर्चस्व कायम करने के कारण इन्हें महान “सेनानी”” दक्ष प्रशासक” की उपाधि प्राप्त हुई 1946 से 48 तक पंजाब प्रांत के कांग्रेस के अध्यक्ष वह सरकार के राजस्व मंत्री ,1951 से सार्वजनिक निर्माण विभाग तथा कृषि मंत्री, राज्यसभा का सदस्य, 1972 में पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री बने! और विभिन्न पदों से होते हुए 1982 से 1987 तक देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होकर सातवें राष्ट्रपति के रूप में यह जन -मानस में संदेश दिया” कोई काम नहीं है मुश्किल” यदि हुआ इरादा पक्का” 25 दिसंबर 1994 को ऐसे महान समाजसेवी, शिल्पकार, दस्त कार, एवं दलित तथा किशोरों के अद्भुत मसीहा इस संसार से वितरित हो गये! कार्यक्रम के दौरान आए हुए अतिथियों एवं पत्रकार बंधुओं के साथ साथ अधिवक्ता एवं वरिष्ठ जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संस्कृति प्रोग्राम शिवचरण चौहान द्वारा प्रस्तुत किया गया। सर्वश्री:- राम प्रकाश त्रिपाठी अधिवक्ता, राम अवध प्रजापति, रामसरन राम, रजनीश विश्वकर्मा, रामलगन विश्वकर्मा ,रामेश्वर शर्मा उर्फ गुड्डू, योगेश विश्वकर्मा, सुकैलेस प्रधान ,बरखु बनवासी कैलाश प्रसाद गोंड, सत्येंद्र कुमार, लोकनायक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कन्हैया लाल श्रीवास्तव जी, अमित खरवार ,प्रभाकर गोंड समेत आदि लोगों  को ” भगवान विश्वकर्मा ” एवं महामानव भारत रत्ना डॉक्टर “भीमराव अंबेडकर “साहब का चित्र के साथ अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। 

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